pina_AIA2RFAWACV3EAAAGAAFWDOZ3JH2PGQBAAAAACNSESGPGMQ4WT6TT2LLIGAV3NKHXBYZHSXR7HT3AYTCBUEVP4OMQAC74YIA { "event_id": "eventId0001" } { "event_id": "eventId0001" } https://www.profitablecpmrate.com/gtfhp9z6u?key=af9a967ab51882fa8e8eec44994969ec Vastu Astro / Astrologer Pandarama: December 2025

Friday, December 19, 2025

वैदिक वास्तु शास्त्र :

वैदिक वास्तु शास्त्र : 

इलेक्ट्रॉनिक सामान घर में बार-बार हो जाते हैं खराब ?

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में इलेक्ट्रॉनिक सामान के बार - बार खराब होना अशुभ संकेत माना जाता है। 

वास्तु शास्त्र और ज्योतिष में राहु के अशुभ प्रभाव और वास्तु दोष का कारण भी माना जाता है। 


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ऐसे में बार - बार रिपेयर करने या नया सामान खरीदने से आर्थिक नुकसान की स्थिति बनी रहती है।​

वास्तु शास्त्र के अनुसार क्या आपके घर में टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, इन्वर्टर या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बार - बार खराब हो जाते हैं ? 

वास्तु शास्त्र और ज्योतिष में इसे नकारात्मक ऊर्जा और खराब ग्रह दशा के संकेत के तौर पर देखा जाता है। 

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माना जाता है कि बार - बार इलेक्ट्रॉनिक सामान का खराब होना राहु के अशुभ प्रभाव और वास्तु दोष का संकेत हो सकता है। 

घर में ऊर्जा के असंतुलन का सीधा असर घर की इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर पड़ता है। 

वास्तु के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अग्नि तत्त्व से जुड़े होते हैं, इस लिए इन्हें सही दिशा में न रखने पर घर के ऊर्जा संतुलन में बाधा आती है।

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घर की दक्षिण - पूर्व दिशा का वास्तु उपाय :

वास्तु शास्त्र के अनुसार राहु को बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जुड़ा ग्रह माना जाता है। 

अगर कुंडली में राहु अशुभ हो तो घर में इलेक्ट्रॉनिक सामान तेजी से खराब होने लगते हैं। 

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ऐसे में अचानक शॉर्ट सर्किट या बार - बार रिपेयर करने की जरूरत पड़ने लगती है। 

यह स्थिति धीरे - धीरे मानसिक तनाव और आर्थिक तंगी का कारण भी बन सकती है। 

घर में खराब या टूटे हुए इलेक्ट्रॉनिक सामान का होना राहु दोष का संकेत माना जाता है, जो धन हानि का कारण बनता है।


वैदिक वास्तु शास्त्र : http://Sarswatijyotish.com


वास्तु दोष और राहु के अशुभ प्रभाव को दूर करने के उपाय :


वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में पड़ा फ्यूज बल्ब, टूटा चार्जर, खराब मोबाइल और खराब गैजेट तुरंत रिपेयर करवा लें या घर से बाहर निकाल दें। 


ये घर में वास्तु दोष का कारण माने जाते हैं।

हफ्ते में एक दिन घर में नमक मिले पानी से पोछा लगाएं। 

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माना जाता है कि इस से घर की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।

फ्रिज, माइक्रोवेव, मिक्सर, गीजर, टीवी जैसे भारी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को दक्षिण - पूर्व दिशा में रखें। 

उत्तर - पूर्व दिशा में अधिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रखना आपके परेशानी का कारण ब सकते हैं।

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वैदिक ज्योतिष के अनुसार, राहु को शांत करने के लिए शुक्रवार या शनिवार के दिन काले या सफेद कुत्ते को मीठी रोटी खिलाना शुभ माना जाता है।


शाम के समय घर के मुख्य दरवाजे के पास सरसों तेल या तिल के तेल का दीपक जलाएं। 

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इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होने लगती है।

नया इलेक्ट्रॉनिक सामान चालू करने से पहले हल्दी या कुंकुम का तिलक करें और उस पर स्वास्तिक का निशान बनाएं।


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जब ग्रहदशा प्रतिकूल हो भूखण्ड का आकार व्यक्ति के भाग्य को प्रभावित करता है :


वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार वर्गाकार भूखण्ड, आयताकार भूखण्ड, गोलाकार भूखण्ड और त्रिकोणाकार भूखण्ड जानने के बाद चक्राकार भूखण्ड, शकटाकार भूखण्ड, पंखाकार भूखण्ड, तबलाकार भूखण्ड और शूर्पाकार भूखण्ड को भी समझना आवश्यक है, क्योंकि भूखण्ड के आकार का प्रभाव व्यक्ति की ग्रहदशा एवं भाग्य पर पड़ता है।

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तख्ताकार भूखण्ड- 


तख्ताकार भूखण्ड- जहां आयताकार भूखण्ड में लंबाई और चौड़ाई को 2:1 होना काफी अच्छा माना गया है...! 

2:1 अनुपात का मतलब, जैसे लम्बाई अगर 20 फिट हो, तो चौड़ाई 10 फिट होनी चाहिए..! 

वहीं तख्ताकार भूखण्ड में भूमि की लंबाई और चौड़ाई 3:1 के अंतर में होती है। 

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ऐसी भूमि वास्तु नियमों के अनुसार ग्राह्म तो हैं परंतु ऐसा देखा गया है कि तख्ताकार भूखण्ड में ब्रह्म स्थान में दो दिशाएं नजदीक और दो दिशाएं दूर होने से घर के सदस्यों के बीच एकमत नहीं रहता। 

ग्रहदशा में बलवान होने पर ऐसी भूमि पर बने मकान में रहने वाले का स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति एक जैसी नहीं रहती है, कभी शुभ तो कभी अशुभ होता रहता है।

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शकटाकार भूखण्ड- 


शकटाकार भूखण्ड- शकटाकार भूखंड देखने में रथ अथवा बैलगाड़ी के आकार के समान दिखाई देता है। 

वास्तु अनुसार इस भूखंड पर भवन निर्माण करना अशुभ फलदायक होता है। 

जिसके पास यह भूखण्ड हो, वह आवश्यकता पड़ने पर इसे गोदाम के रूप में प्रयोग कर सकता है।

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चक्राकार भूखण्ड-


चक्राकार भूखण्ड- चक्राकार भूमि वह होती है जो देखने में पहिए यानी चक्र की तरह होती है यह भूमि गोल यानी वृत नहीं होती है...! 

लेकिन थोड़ी बहुत वैसे ही आकार की कही जा सकती है परंतु जहां एक ओर वृत्ताकार भूमि शुभ होती है, वहीं दूसरी ओर चक्राकार भूमि अशुभ कहलाती है। 

इस भूखंड पर भवन निर्माण करके निवास करने पर अगर भूमि मालिक अथवा उसमें रहने वालों की ग्रहदशा कमजोर हो तो उन्हें निर्धनता, कष्ट, क्लेश, रोग, बीमारियां आदि झेलनी पड़ती है..! 

इस लिए इस भूमि को हानिकारक माना गया है।

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मृदंग/तबलाकार भूखण्ड- 


मृदंग/तबलाकार भूखण्ड- जो भूखण्ड मृदंग या ढोलक, तबले के आकार के समान दिखाई पड़ता है, उसे तबला कारक या मृदंगाकार भूखंड कहा जाता है। 

इस भूखंड पर निवास करने से भूस्वामी पर अशुभ प्रभाव पड़ता है। 

मृदंग आकार भूखंड स्त्रियों के लिए अशुभ माना गया है।

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शूर्पाकार भूखण्ड- 


शूर्पाकार भूखण्ड- छाजन या शूर्प के आकार की भूमि शूर्पाकार कहलाती हैं, इस प्रकार के भूखण्ड पर भूस्वामी का निवास करना अशुभ होता है..! 

भूस्वामी का आय से ज्यादा व्यय रहता हैं, जन्मपत्री में अशुभ ग्रहों की दशा आने पर इस भूमि का वास्तुदोष धन सम्पत्ति टिकने नहीं देता है।

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पंखाकार भूखण्ड- 


पंखाकार भूखण्ड- पंखाकार भूखंड हाथ के पंखे के आकार के समान दिखाई देता है। 

यह भूमि भी भूस्वामी की ग्रहदशा विपरीत होने पर भूस्वामी के लिए अशुभ, कष्टकारक, धन नाशक होती है।

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!!!!! शुभमस्तु !!!

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -
श्री सरस्वति ज्योतिष कार्यालय
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 
" Opp. Shri Satvara vidhyarthi bhuvn,
" Shri Aalbai Niwas "
Shri Maha Prabhuji bethak Road,
JAM KHAMBHALIYA - 361305 (GUJRAT )
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नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

Tuesday, December 2, 2025

वास्तु शास्त्र : भूखंड -

वास्तु शास्त्र : भूखंड -   

सुख - सम्पत्ति तो कुछ भूखण्ड देते हैं कुछ लाते हैं जीवन में विपत्ति :

भूखंड के आकार का शुभाशुभ प्रभाव व्यक्ति के जीवन, धन, सुख - सुविधा और मानसिक स्थिति को गहराई से प्रभावित करता है, कुछ आकार समृद्धि देते हैं, जबकि कुछ निरंतर कष्ट, विवाद और हानि का कारण बनते हैं। 


आइए जानें कौन - सा भूखंड देता है सुख - संपत्ति और कौन - सा भूखण्ड ला सकता है जीवन में संकट।


अगर मकान वास्तु शास्त्र के अनुसार शुभ भूमि पर बना हो तो खराब ग्रह दशा होने पर भी अनिष्ट ग्रहों का प्रभाव उतना नहीं पड़ता, जितना कि वास्तु विपरीत भूमि पर निर्माण करने पर व्यक्ति को कष्ट सहना पड़ता है।



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वर्गाकार भूखंड - :

वर्गाकार भूखंड - जिस भूमि की लंबाई चौड़ाई समान हों, अंदर के चारों कोण 90 डिग्री के हो, इसे वर्गाकार भूमि कहते हैं, जो कि शुभ। 

अगर चारों दिशाओं और कोणों का ध्यान रखकर वास्तु सम्मत भवन बनाया जाए तो उसमें निवास करने वालों के जीवन में सुख - समृद्धि रहती है।

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आयताकार भूखंड - :

आयताकार भूखंड - जिस भूखंड की लंबाई अधिक, चौड़ाई कम हो, आमने - सामने की सीमाएं बराबर हो तथा चारों कोनों में समकोण 90 डिग्री बनाता हो, उसे आयताकार भूमि कहते हैं। 

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वास्तु शास्त्र की दृष्टि से यह भूखंड श्रेष्ठ कहलाता है, इस पर भवन निर्माण करना धन, यश और सफलता का प्रतीक बनता है।

वृत्ताकार यानि गोलाकार भूखंड - :

वृत्ताकार यानि गोलाकार भूखंड- गोल अर्थात् वृत के आकार की भूमि बहुत ही दुर्लभ होती है, अनेक लोग अपने बहुकोणीय भूखंड को गोलाई की परिधि में ले आते हैं। 

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ऐसी भूमि पर मकान बनाकर रहने से धन का प्रचुर लाभ होता है, आमदनी के कई स्रोत खुलते हैं। 

घर में नाना प्रकार के सुख - साधन तथा सजावट की वस्तुएं रहती है।

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त्रिकोणाकार भूखण्ड - : 

त्रिकोणाकार भूखण्ड- त्रिकोणाकार भूमि बहुत कम देखने में आती हैं, जिस भूमि में तीन कोने एक त्रिकोण की आकृति लेते हों, उसे त्रिभुजाकार या त्रिकोणाकार भूमि कहते हैं। 

इस प्रकार की भूमि कष्ट, दुःख, क्लेश एवं कलहकारक मानी जाती है, इसमें रहने वाले को दैवी आपदा झेलनी पड़ती है, इसलिए इस तरह की भूमि में प्रायः मंदिर आदि का निर्माण ही फलप्रद रहता है। 

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इस भूमि पर निवास करने पर कानूनी अड़चनें मुकदमा, राजभय तथा कारागार आदि का भय रहता है। 

अगर वास्तु नियमों के अनुसार इसकी काट-छांठ की जाए तो बहुत सी भूमि बेकार चली जाती है, इसमें किसी प्रकार का परिवर्तन करना आसान नहीं होता। 

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जहां तक हो इसे मकान बनाने के लिए उपयोग में कदापि नहीं लाना चाहिए।

इस प्रकार चक्राकार भूखण्ड, शकटाकार भूखण्ड, पंखाकार भूखण्ड, तबलाकार भूखण्ड, शूर्पाकार भूखण्ड जैसे कई प्रकार के भूखण्ड लम्बाई - चौड़ाई के भेद से देखने को मिलते हैं।


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पहले घर से बाहर करें ये चीजें, ताकि परिवार में बनी रहे खुशहाली :

वास्तु शास्त्र में कुछ चीजों को घर में रखना बिल्कुल भी शुभ नहीं माना गया। 

इस से पॉजिटिव एनर्जी के फ्लो में रुकावट पैदा हो सकती है और नेगेटिविटी बढ़ती है। 

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ऐसे में जितना जल्दी हो सके, इन चीजों को घर से बाहर कर देना चाहिए। 

चलिए जानते हैं इस बारे में।

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खुशहाली के लिए नए साल से पहले घर में करें ये बदलाव

पुरानी व बेकार चीजें बढ़ा सकती हैं नकारात्मकता।

घर से बाहर कर देनी चाहिए इस तरह की चीजें।

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ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आने वाले साल में घर - परिवार में खुशहाली का माहौल बना रहे, तो इस के लिए आप कुछ वास्तु टिप्स ( Vastu Tips ) अपना सकते हैं। 

आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आपको नए साल से पहले किन चीजों को अपने घर से बाहर कर देना चाहिए।

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घर से हटाएं ये चीजें :

पहले आप अपने घर में पड़ी पुरानी व बेकार चीजों जैसे फर्नीचर या जंग लगे लोहे के सामान आदि को हटा सकते हैं। 

ये चीजें नकारात्मकता को बढ़ा सकती हैं, जिसका प्रभाव आपके दैनिक जीवन पर भी पड़ता है। 

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साथ ही वास्तु शास्त्र में माना गया है कि घर में कभी भी बेकार पड़े जूतों और बंद घड़ी को नहीं रखना चाहिए, क्योंकि ये चीजें दुर्भाग्य को बढ़ावा देती हैं।

मिल सकते हैं नकारात्मक परिणाम :

वास्तु शास्त्र में रसोई को लेकर भी कुछ नियम बताए गए हैं जिसके अनुसार, किचन में आपको टूटे - फूटे या चटके हुए बर्तन रखने से बचना चाहिए। 

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ऐसा करने से घर में दरिद्रता का वास बढ़ने लगता है। 

ऐसे में नए साल से पहले इस बर्तनों को घर से बाहर जरूर कर दें।

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पड़ता है बुरा प्रभाव :

वास्तु शास्त्र में माना गया है कि घर में खराब हो चुके उपकरण या फिर बेकार पड़े सामान जैसे फ्रिज, वाशिंग मशीन आदि को रखने से भी नकारात्मक ऊर्जा पैदा होने लगती है। 

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जिसके चलते आपको कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। 

ऐसे में या तो इन उपकरणों को ठीक करवा लेना चाहिए या फिर घर से बाहर कर देना चाहिए।

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वैदिक वास्तु शास्त्र :

वैदिक वास्तु शास्त्र : कितनी हो घर में खिड़कियां ? ये दिशा बन सकती हैं बदहाली का कारण : वैदिक वास्तु शास्त्र में घर को ऊर्जा का केंद्र माना ...