वैदिक वास्तु शास्त्र :
इलेक्ट्रॉनिक सामान घर में बार-बार हो जाते हैं खराब ?
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में इलेक्ट्रॉनिक सामान के बार - बार खराब होना अशुभ संकेत माना जाता है।
वास्तु शास्त्र और ज्योतिष में राहु के अशुभ प्रभाव और वास्तु दोष का कारण भी माना जाता है।
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ऐसे में बार - बार रिपेयर करने या नया सामान खरीदने से आर्थिक नुकसान की स्थिति बनी रहती है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार क्या आपके घर में टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, इन्वर्टर या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बार - बार खराब हो जाते हैं ?
वास्तु शास्त्र और ज्योतिष में इसे नकारात्मक ऊर्जा और खराब ग्रह दशा के संकेत के तौर पर देखा जाता है।
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माना जाता है कि बार - बार इलेक्ट्रॉनिक सामान का खराब होना राहु के अशुभ प्रभाव और वास्तु दोष का संकेत हो सकता है।
घर में ऊर्जा के असंतुलन का सीधा असर घर की इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर पड़ता है।
वास्तु के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अग्नि तत्त्व से जुड़े होते हैं, इस लिए इन्हें सही दिशा में न रखने पर घर के ऊर्जा संतुलन में बाधा आती है।
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घर की दक्षिण - पूर्व दिशा का वास्तु उपाय :
वास्तु शास्त्र के अनुसार राहु को बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जुड़ा ग्रह माना जाता है।
अगर कुंडली में राहु अशुभ हो तो घर में इलेक्ट्रॉनिक सामान तेजी से खराब होने लगते हैं।
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ऐसे में अचानक शॉर्ट सर्किट या बार - बार रिपेयर करने की जरूरत पड़ने लगती है।
यह स्थिति धीरे - धीरे मानसिक तनाव और आर्थिक तंगी का कारण भी बन सकती है।
घर में खराब या टूटे हुए इलेक्ट्रॉनिक सामान का होना राहु दोष का संकेत माना जाता है, जो धन हानि का कारण बनता है।
वास्तु दोष और राहु के अशुभ प्रभाव को दूर करने के उपाय :
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में पड़ा फ्यूज बल्ब, टूटा चार्जर, खराब मोबाइल और खराब गैजेट तुरंत रिपेयर करवा लें या घर से बाहर निकाल दें।
ये घर में वास्तु दोष का कारण माने जाते हैं।
हफ्ते में एक दिन घर में नमक मिले पानी से पोछा लगाएं।
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माना जाता है कि इस से घर की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।
फ्रिज, माइक्रोवेव, मिक्सर, गीजर, टीवी जैसे भारी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को दक्षिण - पूर्व दिशा में रखें।
उत्तर - पूर्व दिशा में अधिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रखना आपके परेशानी का कारण ब सकते हैं।
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वैदिक ज्योतिष के अनुसार, राहु को शांत करने के लिए शुक्रवार या शनिवार के दिन काले या सफेद कुत्ते को मीठी रोटी खिलाना शुभ माना जाता है।
शाम के समय घर के मुख्य दरवाजे के पास सरसों तेल या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
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इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होने लगती है।
नया इलेक्ट्रॉनिक सामान चालू करने से पहले हल्दी या कुंकुम का तिलक करें और उस पर स्वास्तिक का निशान बनाएं।
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जब ग्रहदशा प्रतिकूल हो भूखण्ड का आकार व्यक्ति के भाग्य को प्रभावित करता है :
वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार वर्गाकार भूखण्ड, आयताकार भूखण्ड, गोलाकार भूखण्ड और त्रिकोणाकार भूखण्ड जानने के बाद चक्राकार भूखण्ड, शकटाकार भूखण्ड, पंखाकार भूखण्ड, तबलाकार भूखण्ड और शूर्पाकार भूखण्ड को भी समझना आवश्यक है, क्योंकि भूखण्ड के आकार का प्रभाव व्यक्ति की ग्रहदशा एवं भाग्य पर पड़ता है।
+++ +++तख्ताकार भूखण्ड-
तख्ताकार भूखण्ड- जहां आयताकार भूखण्ड में लंबाई और चौड़ाई को 2:1 होना काफी अच्छा माना गया है...!
2:1 अनुपात का मतलब, जैसे लम्बाई अगर 20 फिट हो, तो चौड़ाई 10 फिट होनी चाहिए..!
वहीं तख्ताकार भूखण्ड में भूमि की लंबाई और चौड़ाई 3:1 के अंतर में होती है।
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ऐसी भूमि वास्तु नियमों के अनुसार ग्राह्म तो हैं परंतु ऐसा देखा गया है कि तख्ताकार भूखण्ड में ब्रह्म स्थान में दो दिशाएं नजदीक और दो दिशाएं दूर होने से घर के सदस्यों के बीच एकमत नहीं रहता।
ग्रहदशा में बलवान होने पर ऐसी भूमि पर बने मकान में रहने वाले का स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति एक जैसी नहीं रहती है, कभी शुभ तो कभी अशुभ होता रहता है।
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शकटाकार भूखण्ड-
शकटाकार भूखण्ड- शकटाकार भूखंड देखने में रथ अथवा बैलगाड़ी के आकार के समान दिखाई देता है।
वास्तु अनुसार इस भूखंड पर भवन निर्माण करना अशुभ फलदायक होता है।
जिसके पास यह भूखण्ड हो, वह आवश्यकता पड़ने पर इसे गोदाम के रूप में प्रयोग कर सकता है।
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चक्राकार भूखण्ड-
चक्राकार भूखण्ड- चक्राकार भूमि वह होती है जो देखने में पहिए यानी चक्र की तरह होती है यह भूमि गोल यानी वृत नहीं होती है...!
लेकिन थोड़ी बहुत वैसे ही आकार की कही जा सकती है परंतु जहां एक ओर वृत्ताकार भूमि शुभ होती है, वहीं दूसरी ओर चक्राकार भूमि अशुभ कहलाती है।
इस भूखंड पर भवन निर्माण करके निवास करने पर अगर भूमि मालिक अथवा उसमें रहने वालों की ग्रहदशा कमजोर हो तो उन्हें निर्धनता, कष्ट, क्लेश, रोग, बीमारियां आदि झेलनी पड़ती है..!
इस लिए इस भूमि को हानिकारक माना गया है।
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मृदंग/तबलाकार भूखण्ड-
मृदंग/तबलाकार भूखण्ड- जो भूखण्ड मृदंग या ढोलक, तबले के आकार के समान दिखाई पड़ता है, उसे तबला कारक या मृदंगाकार भूखंड कहा जाता है।
इस भूखंड पर निवास करने से भूस्वामी पर अशुभ प्रभाव पड़ता है।
मृदंग आकार भूखंड स्त्रियों के लिए अशुभ माना गया है।
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शूर्पाकार भूखण्ड-
शूर्पाकार भूखण्ड- छाजन या शूर्प के आकार की भूमि शूर्पाकार कहलाती हैं, इस प्रकार के भूखण्ड पर भूस्वामी का निवास करना अशुभ होता है..!
भूस्वामी का आय से ज्यादा व्यय रहता हैं, जन्मपत्री में अशुभ ग्रहों की दशा आने पर इस भूमि का वास्तुदोष धन सम्पत्ति टिकने नहीं देता है।
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पंखाकार भूखण्ड-
पंखाकार भूखण्ड- पंखाकार भूखंड हाथ के पंखे के आकार के समान दिखाई देता है।
यह भूमि भी भूस्वामी की ग्रहदशा विपरीत होने पर भूस्वामी के लिए अशुभ, कष्टकारक, धन नाशक होती है।
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!!!!! शुभमस्तु !!!


