pina_AIA2RFAWACV3EAAAGAAFWDOZ3JH2PGQBAAAAACNSESGPGMQ4WT6TT2LLIGAV3NKHXBYZHSXR7HT3AYTCBUEVP4OMQAC74YIA { "event_id": "eventId0001" } { "event_id": "eventId0001" } https://www.profitablecpmrate.com/gtfhp9z6u?key=af9a967ab51882fa8e8eec44994969ec Vastu Astro / Astrologer Pandarama: January 2026

Sunday, January 11, 2026

वैदिक वास्तु शास्त्र :

वैदिक वास्तु शास्त्र :


कितनी हो घर में खिड़कियां ? ये दिशा बन सकती हैं बदहाली का कारण :


वैदिक वास्तु शास्त्र में घर को ऊर्जा का केंद्र माना गया है,  माना जाता है कि घर की बनावट व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर डालती है।  


घर का हर हिस्सा मुख्य द्वार, रसोई, शयनकक्ष और खिड़कियां वास्तु के अनुसार सही हो,  तो घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।



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वैदिक शास्त्र के अनुसार घर केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि ऊर्जा का केंद्र होता है.  घर का हर हिस्सा  चाहे वह मुख्य द्वार हो, रसोई, शयनकक्ष या फिर खिड़कियां ही क्यों ना हो, यह सभी सीधे तौर पर व्यक्ति के जीवन पर असर डालती हैं।  


वैदिक वास्तु के मुताबिक इन संरचनाओं की सही या गलत स्थिति सकारात्मकता और नकारात्मकता दोनों को जन्म दे सकती है। 

खिड़कियों को वास्तु में विशेष महत्व दिया गया है, क्योंकि यहीं से घर के भीतर सूरज की रोशनी, ताजी हवा और ऊर्जा का प्रवेश होता है. सही रौशनी और वेंटिलेशन न केवल सेहत के लिए जरूरी है। 

बल्कि मानसिक संतुलन और घर के माहौल पर भी असर डालती हैं। 

इसी कारण वास्तु शास्त्र में खिड़कियों की संख्या,  आकार और दिशा को लेकर खास नियम बताए गए हैं ।
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वास्तु के जानकारों के मुताबिक अगर खिड़कियां सही दिशा और सही संख्या में हों,  तो घर में सुख - शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। 

वहीं, इन नियमों की अनदेखी करने पर घर में तनाव,  आर्थिक परेशानियां और स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां पैदा हो सकती हैं। 

यही वजह है कि घर बनवाते समय या रिनोवेशन के दौरान खिड़कियों की स्थिति पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है ।

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इतनी खिड़कियां शुभ :


वास्तु के अनुसार घर में खिड़कियों की संख्या हमेशा सम ( Even Number ) में होनी चाहिए. जैसे 2, 4, 6 या 8 खिड़कियां शुभ मानी जाती हैं। 


इस के विपरीत, 3, 5, 7 या 9 जैसी विषम संख्या में बनी खिड़कियां घर की ऊर्जा को असंतुलित कर सकती हैं. मान्यता है कि सम संख्या में खिड़कियां होने से घर में ऊर्जा का प्रवाह संतुलित रहता है। 

जिससे मानसिक शांति, पारिवारिक सौहार्द और आर्थिक स्थिरता बनी रहती है. यही कारण है कि वास्तु विशेषज्ञ घर बनवाते समय इस पहलू पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हैं। 
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खिड़कियों की सही दिशा का महत्व :


सिर्फ संख्या ही नहीं, बल्कि खिड़कियों की दिशा भी उतनी ही ज्यादा अहम होती है। 


वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर और पूर्व दिशा में बनी खिड़कियां बेहद शुभ मानी जाती हैं. इन दिशाओं से आने वाली सूर्य की किरणें और ताजी हवा घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं. पूर्व दिशा से उगता हुआ सूर्य स्वास्थ्य, उत्साह और नई शुरुआत का प्रतीक है।  

जबकि उत्तर दिशा को धन और अवसरों की दिशा माना जाता है. इन दिशाओं में खिड़कियां होने से घर में खुशहाली और प्रगति के योग बढ़ते हैं। 
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किन दिशाओं से बचना चाहिए :


वैदिक वास्तु के अनुसार दक्षिण और दक्षिण - पश्चिम  दिशा में अधिक या बड़ी खिड़कियां बनवाने से बचना चाहिए। 

क्योंकि इससे घर की स्थिर ऊर्जा प्रभावित हो सकती है. ऐसी स्थिति में आर्थिक अस्थिरता, तनाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं.

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वैदिक वास्तु शास्त्र मे फ्रिज के ऊपर गलती से भी न रखें ये चीजें, चारों तरफ से घेर लेता है : 


वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार जब घर, दुकान या किसी भी स्थान की बनावट, दिशा, ऊर्जा प्रवाह या वस्तुओं का स्थान प्राकृतिक नियमों के विपरीत हो जाता है, तो उसे वास्तु दोष कहा जाता है. इसका असर धीरे-धीरे व्यक्ति के जीवन, स्वास्थ्य, धन और मानसिक शांति पर दिखाई देने लगता है.

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वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार आज के समय में फ्रिज हर घर की बुनियादी जरूरत बन चुका है. खाना सुरक्षित रखने से लेकर रोजमर्रा की लाइफ को आसान बनाने तक, फ्रिज हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। 

लेकिन सुविधा के चक्कर में अक्सर लोग फ्रिज के ऊपर अलग-अलग सामान रखना शुरू कर देते हैं, जिससे उसका ऊपरी हिस्सा भरा हुआ नजर आता है. क्या आप जानती हैं कि यह आदत वास्तु के अनुसार घर में नकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकती है?

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वैदिक ज्योतिष शास्त्र और वैदिक वास्तु शास्त्र एक्सपर्ट के अनुसार, फ्रिज के ऊपर रखा गया गलत सामान घर की ऊर्जा, स्वास्थ्य और मानसिक शांति को प्रभावित कर सकता है। 

आइए जानते हैं कि फ्रिज के ऊपर कौन - सी चीजें नहीं रखनी चाहिए और इसके पीछे का वास्तु कारण क्या है।
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फ्रिज के ऊपर दवाइयां रखना नुकसानदायक :


वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार आज कल हम दिख रहे होते है की अक्सर घरों में दवाइयों का डिब्बा ऐसी जगह रखा जाता है। 

जहां से वह जल्दी मिल जाए, और इसी वजह से लोग उसे फ्रिज के ऊपर रख देते हैं। 

वास्तु अनुसार ऐसा करना सेहत से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है. फ्रिज ठंडक और भारी ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। 

जब कि दवाइयां बीमारी की ऊर्जा से जुड़ी होती हैं. इन दोनों का मेल घर में नकारात्मक कंपन पैदा करता है। 

जिससे बार - बार बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है. इस लिए दवाइयों को हमेशा किसी साफ, बंद अलमारी या ड्रॉअर में रखना बेहतर माना जाता है।
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इलेक्ट्रॉनिक के सामान  भी फ्रिज के ऊपर ही :


बहुत से लोग चार्जर, एक्सटेंशन बोर्ड, एडेप्टर या छोटी लाइट्स को फ्रिज के ऊपर रख देते हैं


लेकिन फ्रिज पहले से ही एक शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। 

जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एनर्जी उत्पन्न करता है. ऐसे में उसके ऊपर और इलेक्ट्रॉनिक सामान रखने से घर में ऊर्जा असंतुलित हो जाती है। 

वास्तु के लिहाज से यह अग्नि तत्व को बढ़ाता है, जिससे चिड़चिड़ापन, तनाव और आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं. साथ ही इससे आर्थिक और मानसिक परेशानियां भी जन्म ले सकती हैं।
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पूजा से जुड़ी चीजें फ्रिज के ऊपर रखना क्यों है गलत :


कई बार जगह की कमी के कारण लोग पूजा की किताबें, माला, अगरबत्ती या दीपक की थाली फ्रिज के ऊपर रख देते हैं। 

एस्ट्रोलॉजी के मुताबिक, पूजा से जुड़ी वस्तुएं हमेशा पवित्र और स्थिर स्थान पर रखनी चाहिए। 

फ्रिज जैसी भारी और इलेक्ट्रॉनिक मशीन के ऊपर इन्हें रखने से पूजा का सकारात्मक प्रभाव कम हो जाता है और घर की शुभ ऊर्जा बाधित होती है। 

धार्मिक वस्तुओं के लिए अलग मंदिर या साफ शेल्फ का होना बहुत जरूरी है.
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खाली और साफ रखना फ्रिज के ऊपरी हिस्सा क्यों जरूरी :


वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार, फ्रिज घर में सुख-सुविधा और भोजन की निरंतरता का प्रतीक होता है। 

अगर इसके ऊपर अनावश्यक सामान रखा जाए, तो यह अव्यवस्था और रुकावट की ऊर्जा को दर्शाता है। 

फ्रिज का ऊपरी हिस्सा साफ और खाली रखने से घर में आर्थिक स्थिरता, बेहतर स्वास्थ्य और सकारात्मक माहौल बना रहता है।
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हर हर महादेव जय मां अंबे मां !!!!! शुभमस्तु !!! 


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Wednesday, January 7, 2026

वैदिक वास्तु शास्त्र :

वैदिक वास्तु शास्त्र :


वैदिक वास्तु शास्त्र में घर में होते हैं टूटे शीशे तो नुकसान ही होता रहेगा ?


वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार जो आपका घर में ही रखी हर वस्तु ऊर्जा से जुड़ी होती है।  

शीशा ( मिरर ) व्यक्ति की छवि के साथ - साथ उसकी ऊर्जा को भी दर्शाता है, ऐसे में अगर घर में टूटा हुआ शीशा या दरार वाला कांच रखा हो,  तो उसे शास्त्र के नियम अनुसार बहुत ही अशुभ माना जाता है।


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वैदिक वास्तु शास्त्र एक प्राचीन विज्ञान है, जिसका उद्देश्य घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना होता है।  


कहा जाता है कि अगर घर में ऊर्जा सही दिशा में बहती है, तो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

वास्तु के अनुसार कुछ चीजें ऐसी होती हैं,  जिन्हें घर में रखना अशुभ माना जाता है। 

इन्हीं में से एक है टूटा हुआ शीशा या कांच.अगर आपके घर में कहीं भी टूटा हुआ शीशा रखा है। 
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तो उसे तुरंत बाहर ही निकाल देना चाहिए।

वैदिक वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार टूटा हुआ शीशा नकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। 

शीशा व्यक्ति की छवि और ऊर्जा को दर्शाता है. जब शीशा टूट जाता है। 

तो वह सकारात्मक ऊर्जा को कम करता है और नकारात्मक प्रभाव बढ़ाने लगता है। 

इस का असर धीरे - धीरे पूरे घर और घर में रहने वाले लोगों पर पड़ता है ।
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कलेश घर में बठता है :


टूटे हुए कांच या शीशे से निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा घर के माहौल को बिगाड़ देती है। 

ऐसे घरों में छोटी - छोटी बातों पर झगड़े होने लगते हैं। 

परिवार के सदस्यों के बीच तनाव, मनमुटाव और अशांति बनी रहती है। 

बिना किसी बड़ी वजह के गुस्सा, चिड़चिड़ापन और मानसिक अशांति महसूस होती है।

कई बार घर का माहौल इतना भारी हो जाता है कि शांति से रहना मुश्किल हो जाता है।
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आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है :


वैदिक वास्तु के अनुसार टूटा हुआ शीशा आर्थिक नुकसान का भी संकेत माना जाता है। 


ऐसे घरों में पैसों की तंगी बनी रहती है। 

कमाई के रास्ते में रुकावटें आने लगती हैं और खर्चे अचानक बढ़ जाते हैं। 

मेहनत के बावजूद धन टिक नहीं पाता. कई बार नौकरी या व्यापार में नुकसान होने लगता है । 

जिससे व्यक्ति मानसिक तनाव में आ जाता है।
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बाधा हर काम में आती है :


अगर घर में टूटा हुआ शीशा रखा हो, तो व्यक्ति के काम भी अटकने लगते हैं। 

बनते हुए काम बिगड़ जाते हैं और हर प्रयास में रुकावट महसूस होती है. चाहे पढ़ाई हो। 

नौकरी हो या कोई नया काम शुरू करना हो, हर क्षेत्र में सफलता मिलने में देरी होती है। 

इस से आत्मविश्वास भी धीरे - धीरे कम होने लगता है।
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क्या काम करे ? 


वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर घर में में शीशा या कांच टूट जाए, तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए. बेहतर है कि उसे घर से बाहर फेंक दें और उसकी जगह सही, साफ और बिना दरार वाला शीशा लगवाएं । 

इस से घर में फिर से सकारात्मक ऊर्जा आती है और सुख - शांति बनी रहती है।


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वैदिक वास्तु शास्त्र में वाशिंग मशीन की गलत दिशा : 


वैदिक वास्तु शास्त्र अनुसार गलत दिशा में रखी वाशिंग मशीन न सिर्फ बार - बार खराब होती है, बल्कि घर की ऊर्जा और खर्चो पर भी सीधा असर डालती है। 


वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार, वाशिंग मशीन का सही प्लेसमेंट अपनाकर आप नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकते हैं और घर में सकारात्मकता बढ़ा सकते हैं।

घर में वाशिंग मशीन तो लगभग हर किसी के पास होती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसे गलत दिशा में रखने से भी वास्तु दोष पैदा हो सकता है। 


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जिन घरों में बार - बार मशीन खराब होती है और पानी का लीकेज होता है या अनावश्यक खर्च बढ़ता है, अक्सर इसका कारण मशीन की गलत प्लेसमेंट से होता है। 

वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार, वाशिंग मशीन सिर्फ एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं, बल्कि घर की जल और अग्नि ऊर्जा से जुड़ा महत्त्वपूर्ण तत्व है।  

इस लिए इसे किस दिशा में रखना चाहिए, कौन - सी जगह नुकसानदायक है और मशीन के आसपास क्या सावधानियां रखनी चाहिए. ये सब महत्वपूर्ण बातें जानना बहुत जरूरी है।
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सही दिशा कौनसी वांशिग मशीन की : 


वैदिक वास्तु शास्त्र अनुसार वास्तु के अनुसार, वाशिंग मशीन को उत्तर - पूर्व ( ईशान ) दिशा में रखने से बचना चाहिए, क्योंकि यह दिशा जल और पूजा से जुड़ी मानी जाती है। 


मशीन को रखने के लिए दक्षिण - पूर्व ( अग्नि ) या पश्चिम दिशा सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इस से घर में कार्यों में रुकावट कम होती है और मशीन भी लंबे समय तक सही चलती रहती है ।
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वाशिंग मशीन बाथरूम में रखना अच्छा है या नहीं :


वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर घर में जगह की कमी है तो बाथरूम में रखा जा सकता है। 

लेकिन सुनिश्चित करें कि मशीन दीवार से टिकी न हो, फर्श सूखा रहे और उसका ड्रेन आउटलेट दक्षिण दिशा में हो. इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा रुकती नहीं है।
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गंदे कपड़े कहा पर रखे :


वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार, गंदे कपड़े वाशिंग मशीन के पास अव्यवस्थित ढेर में नहीं रखने चाहिए. इन्हें एक ढक्कन वाली लॉन्ड्री बास्केट में रखें और कोशिश करें कि बास्केट उत्तर-पश्चिम दिशा में हो । 
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यही शुभ रंग वाशिंग मशीन का  होता है :


वैदिक वास्तु शास्त्र के मुताबिक, ईस्ट साउथ ईस्ट दिशा में रखी वाशिंग मशीन के लिए हरा, लाल, गुलाबी, नारंगी, ऑफ व्हाइट, ब्राउन और पीला रंग शुभ माना जाता है। 

वेस्ट नॉर्थ वेस्ट दिशा में मशीन रखने पर पीला, सफेद, नीला और काला रंग अनुकूल माना जाता है। 

अगर आपकी मशीन का रंग दिशा के अनुसार नहीं है, तो आप उसे उसी अनुकूल रंग के कपड़े से ढककर भी रख सकते हैं।
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वैदिक वास्तु शास्त्र :

वैदिक वास्तु शास्त्र : कितनी हो घर में खिड़कियां ? ये दिशा बन सकती हैं बदहाली का कारण : वैदिक वास्तु शास्त्र में घर को ऊर्जा का केंद्र माना ...