वैदिक वास्तु शास्त्र :
वैदिक वास्तु शास्त्र में घर में होते हैं टूटे शीशे तो नुकसान ही होता रहेगा ?
वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार जो आपका घर में ही रखी हर वस्तु ऊर्जा से जुड़ी होती है।
शीशा ( मिरर ) व्यक्ति की छवि के साथ - साथ उसकी ऊर्जा को भी दर्शाता है, ऐसे में अगर घर में टूटा हुआ शीशा या दरार वाला कांच रखा हो, तो उसे शास्त्र के नियम अनुसार बहुत ही अशुभ माना जाता है।
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वैदिक वास्तु शास्त्र एक प्राचीन विज्ञान है, जिसका उद्देश्य घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना होता है।
कहा जाता है कि अगर घर में ऊर्जा सही दिशा में बहती है, तो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
वास्तु के अनुसार कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिन्हें घर में रखना अशुभ माना जाता है।
इन्हीं में से एक है टूटा हुआ शीशा या कांच.अगर आपके घर में कहीं भी टूटा हुआ शीशा रखा है।
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तो उसे तुरंत बाहर ही निकाल देना चाहिए।
वैदिक वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार टूटा हुआ शीशा नकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।
शीशा व्यक्ति की छवि और ऊर्जा को दर्शाता है. जब शीशा टूट जाता है।
तो वह सकारात्मक ऊर्जा को कम करता है और नकारात्मक प्रभाव बढ़ाने लगता है।
इस का असर धीरे - धीरे पूरे घर और घर में रहने वाले लोगों पर पड़ता है ।
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कलेश घर में बठता है :
टूटे हुए कांच या शीशे से निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा घर के माहौल को बिगाड़ देती है।
ऐसे घरों में छोटी - छोटी बातों पर झगड़े होने लगते हैं।
परिवार के सदस्यों के बीच तनाव, मनमुटाव और अशांति बनी रहती है।
बिना किसी बड़ी वजह के गुस्सा, चिड़चिड़ापन और मानसिक अशांति महसूस होती है।
कई बार घर का माहौल इतना भारी हो जाता है कि शांति से रहना मुश्किल हो जाता है।
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आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है :
वैदिक वास्तु के अनुसार टूटा हुआ शीशा आर्थिक नुकसान का भी संकेत माना जाता है।
ऐसे घरों में पैसों की तंगी बनी रहती है।
कमाई के रास्ते में रुकावटें आने लगती हैं और खर्चे अचानक बढ़ जाते हैं।
मेहनत के बावजूद धन टिक नहीं पाता. कई बार नौकरी या व्यापार में नुकसान होने लगता है ।
जिससे व्यक्ति मानसिक तनाव में आ जाता है।
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बाधा हर काम में आती है :
अगर घर में टूटा हुआ शीशा रखा हो, तो व्यक्ति के काम भी अटकने लगते हैं।
बनते हुए काम बिगड़ जाते हैं और हर प्रयास में रुकावट महसूस होती है. चाहे पढ़ाई हो।
नौकरी हो या कोई नया काम शुरू करना हो, हर क्षेत्र में सफलता मिलने में देरी होती है।
इस से आत्मविश्वास भी धीरे - धीरे कम होने लगता है।
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क्या काम करे ?
वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर घर में में शीशा या कांच टूट जाए, तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए. बेहतर है कि उसे घर से बाहर फेंक दें और उसकी जगह सही, साफ और बिना दरार वाला शीशा लगवाएं ।
इस से घर में फिर से सकारात्मक ऊर्जा आती है और सुख - शांति बनी रहती है।
वैदिक वास्तु शास्त्र में वाशिंग मशीन की गलत दिशा :
वैदिक वास्तु शास्त्र अनुसार गलत दिशा में रखी वाशिंग मशीन न सिर्फ बार - बार खराब होती है, बल्कि घर की ऊर्जा और खर्चो पर भी सीधा असर डालती है।
वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार, वाशिंग मशीन का सही प्लेसमेंट अपनाकर आप नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकते हैं और घर में सकारात्मकता बढ़ा सकते हैं।
घर में वाशिंग मशीन तो लगभग हर किसी के पास होती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसे गलत दिशा में रखने से भी वास्तु दोष पैदा हो सकता है।
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जिन घरों में बार - बार मशीन खराब होती है और पानी का लीकेज होता है या अनावश्यक खर्च बढ़ता है, अक्सर इसका कारण मशीन की गलत प्लेसमेंट से होता है।
वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार, वाशिंग मशीन सिर्फ एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं, बल्कि घर की जल और अग्नि ऊर्जा से जुड़ा महत्त्वपूर्ण तत्व है।
इस लिए इसे किस दिशा में रखना चाहिए, कौन - सी जगह नुकसानदायक है और मशीन के आसपास क्या सावधानियां रखनी चाहिए. ये सब महत्वपूर्ण बातें जानना बहुत जरूरी है।
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सही दिशा कौनसी वांशिग मशीन की :
वैदिक वास्तु शास्त्र अनुसार वास्तु के अनुसार, वाशिंग मशीन को उत्तर - पूर्व ( ईशान ) दिशा में रखने से बचना चाहिए, क्योंकि यह दिशा जल और पूजा से जुड़ी मानी जाती है।
मशीन को रखने के लिए दक्षिण - पूर्व ( अग्नि ) या पश्चिम दिशा सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इस से घर में कार्यों में रुकावट कम होती है और मशीन भी लंबे समय तक सही चलती रहती है ।
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वाशिंग मशीन बाथरूम में रखना अच्छा है या नहीं :
वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर घर में जगह की कमी है तो बाथरूम में रखा जा सकता है।
लेकिन सुनिश्चित करें कि मशीन दीवार से टिकी न हो, फर्श सूखा रहे और उसका ड्रेन आउटलेट दक्षिण दिशा में हो. इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा रुकती नहीं है।
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गंदे कपड़े कहा पर रखे :
वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार, गंदे कपड़े वाशिंग मशीन के पास अव्यवस्थित ढेर में नहीं रखने चाहिए. इन्हें एक ढक्कन वाली लॉन्ड्री बास्केट में रखें और कोशिश करें कि बास्केट उत्तर-पश्चिम दिशा में हो ।
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यही शुभ रंग वाशिंग मशीन का होता है :
वैदिक वास्तु शास्त्र के मुताबिक, ईस्ट साउथ ईस्ट दिशा में रखी वाशिंग मशीन के लिए हरा, लाल, गुलाबी, नारंगी, ऑफ व्हाइट, ब्राउन और पीला रंग शुभ माना जाता है।
वेस्ट नॉर्थ वेस्ट दिशा में मशीन रखने पर पीला, सफेद, नीला और काला रंग अनुकूल माना जाता है।
अगर आपकी मशीन का रंग दिशा के अनुसार नहीं है, तो आप उसे उसी अनुकूल रंग के कपड़े से ढककर भी रख सकते हैं।
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